11 दिसंबर 2025: भारत में छात्र आत्महत्याओं का सिलसिला चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों की आत्महत्याओं की संख्या 13,892 तक पहुंच गई, जो कुल आत्महत्याओं का 8.1% है। यह आंकड़ा दशक भर पहले के 8,423 मामलों से 64.9% अधिक है, जो शिक्षा प्रणाली की गंभीर कमियों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक दबाव, प्रतिस्पर्धा और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी इस संकट की जड़ हैं।
NCRB की ‘Accidental Deaths & Suicides in India (ADSI)’ रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 2023 में छात्र आत्महत्याएं कुल 1,71,418 आत्महत्याओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली श्रेणी में शामिल रहीं। 2013 से 2023 तक यह वृद्धि समग्र आत्महत्याओं (51.4% बढ़ोतरी) से भी अधिक है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सबसे अधिक मामले दर्ज हुए, जहां कोटा और अन्य कोचिंग हब्स छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं। लिंग के आधार पर, लड़कियों में वृद्धि 70% से अधिक रही, जो सामाजिक अपेक्षाओं से जुड़ी है। 2022 में 13,044 मामले थे, जो 2023 में मामूली बढ़ोतरी दिखाते हैं, लेकिन लंबी अवधि का ट्रेंड अलार्मिंग है।
इस संकट के पीछे प्रमुख कारण शैक्षणिक तनाव हैं। बोर्ड परीक्षाओं, प्रवेश प्रतियोगिताओं और रैंकिंग की दौड़ में छात्र दबाव में आ जाते हैं। NCRB डेटा से पता चलता है कि 40% से अधिक मामले परीक्षा असफलता या भविष्य की चिंता से जुड़े हैं। इसके अलावा, स्कूल बुलिंग, पारिवारिक अपेक्षाएं और सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव भी जिम्मेदार हैं। आईआईटी जैसे संस्थानों में भी 2021 में 12,526 छात्र आत्महत्याएं दर्ज हुईं, जो अकादमिक दबाव को रेखांकित करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी – केवल 0.75 मनोचिकित्सक प्रति लाख आबादी – समस्या को बढ़ावा दे रही है।
सरकार और समाज को तत्काल कदम उठाने होंगे। शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में ‘मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम’ शुरू किया है, जिसमें स्कूलों में काउंसलर नियुक्ति और जागरूकता अभियान शामिल हैं। लेकिन क्रियान्वयन कमजोर है। सुझावों में शामिल हैं: पाठ्यक्रम में तनाव प्रबंधन को अनिवार्य बनाना, पैरेंट-टीचर मीटिंग्स को नियमित करना और हेल्पलाइन (जैसे कि 104) को मजबूत करना। गैर-सरकारी संगठन IC3 इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट ‘Student Suicides: An Epidemic Sweeping India’ में कहा गया है कि भावनात्मक समर्थन की कमी से बचाव संभव है।
यह संकट न केवल परिवारों को तोड़ रहा है, बल्कि राष्ट्र के भविष्य को प्रभावित कर रहा है। यदि समय रहते हस्तक्षेप न हुआ, तो आंकड़े और भयावह हो जाएंगे। स्कूलों, अभिभावकों और नीति-निर्माताओं को मिलकर एक सुरक्षित, सहायक वातावरण बनाना होगा। अधिक जानकारी के लिए NCRB वेबसाइट पर ADSI रिपोर्ट देखें।