11 दिसंबर 2025: बिहार में भूमि सुधार की प्रक्रिया को गति देने के लिए उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि परिमार्जन प्लस, दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) सहित सभी भूमि संबंधी लंबित वैध आवेदनों का निपटारा मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। यह आदेश जनता की लंबे समय से चली आ रही परेशानियों को दूर करने और भूमि माफियाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। सिन्हा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि देरी या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
यह निर्णय विभाग की हालिया समीक्षा बैठक में लिया गया, जहां दाखिल-खारिज और परिमार्जन में देरी की शिकायतें प्रमुखता से सामने आईं। सिन्हा ने कहा, “राजस्व सेवाओं में विलंब खत्म करना हमारी पहली प्राथमिकता है। जनता को भटकने से बचाना मेरा लक्ष्य है।” पिछले एक वर्ष में प्रगति उल्लेखनीय रही है—परिमार्जन प्लस के निष्पादन दर 27% से बढ़कर 83% हो गई है, जबकि विवादित मामलों में अस्वीकृति दर 17.95% से घटकर 9.72% रह गई। फिर भी, लाखों आवेदन लंबित हैं, जो भूमि विवादों और माफियागिरी को बढ़ावा दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समयसीमा बिहार के 38 जिलों में भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से मजबूत बनाएगी, जिससे किसानों और संपत्ति मालिकों को तत्काल राहत मिलेगी।
आदेश के प्रमुख बिंदु हैं: कोई भी आवेदन बिना लिखित कारण के अस्वीकार या रेफर नहीं किया जाएगा। जो अधिकारी अधिक संख्या में फाइलें रिजेक्ट करते हैं, उनकी जिलावार सूची तैयार कर समीक्षा की जाएगी। फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मामलों की जांच के लिए राज्य स्तरीय विशेष टीम गठित होगी, जो मौके पर जाकर पीड़ित पक्षों की सुनवाई करेगी और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। राजस्व कर्मचारियों को अपने नियत पंचायतों में अनिवार्य उपस्थिति देनी होगी। दो प्रभार वाले मामलों में समय-सारिणी तय होगी, और मुख्यालय से सुबह, दोपहर व शाम तीन बार वीडियो कॉलिंग से उपस्थिति जांच की जाएगी। सभी अंचल कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनकी निगरानी पटना स्थित केंद्रीय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से होगी। राजस्व अदालतों में निर्णय समयबद्ध होंगे, और जिम्मेदार कर्मियों की सूची अंचल व पंचायत भवनों पर प्रदर्शित होगी।
यह पहल भूमि माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान का हिस्सा है। सिन्हा ने खुलासा किया कि सफेदपोश लोग माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं, जिस पर अब सख्ती बरती जाएगी। दिसंबर 2026 तक चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण को भी इस समयसीमा से जोड़ा गया है, ताकि सर्वे के बाद म्यूटेशन प्रक्रिया सुगम हो। 12 दिसंबर को पटना और 15 दिसंबर को लखीसराय में ‘भूमि सुधार जनकल्याण संवाद’ आयोजित होगा, जहां सभी जिलों की समस्याओं को सुना जाएगा।
यह आदेश बिहार की भूमि व्यवस्था में पारदर्शिता लाने का मील का पत्थर साबित हो सकता है। यदि प्रभावी ढंग से लागू हुआ, तो न केवल विवाद कम होंगे, बल्कि आर्थिक विकास को गति मिलेगी। हालांकि, सफलता के लिए विभागीय निगरानी और जन जागरूकता जरूरी है। सरकार को डिजिटल पोर्टल को और मजबूत बनाना चाहिए, ताकि आवेदन ऑनलाइन ट्रैकिंग से आसान हो। अन्यथा, कागजी घोड़े दौड़ाने वाले तत्व फिर सक्रिय हो सकते हैं। बिहार के लाखों भूमि मालिकों को अब उम्मीद की किरण दिख रही है—क्या यह वादा पूरा होगा?