10 दिसंबर 2025: बिहार सरकार की ‘अतिक्रमण हटाओ’ मुहिम ने सीमांचल के कटिहार जिले में जोर पकड़ लिया है। मंगलवार को कुर्सेला और बेगूसराय थाना क्षेत्रों में प्रशासन ने बुलडोजर चला कर सैकड़ों अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई जिला प्रशासन के निर्देश पर की गई, जिसमें सरकारी सड़कों, नालियों और नदी किनारे बने 200 से अधिक घरों, दुकानों और अतिक्रमणों को निशाना बनाया गया। घटना के दौरान भारी पुलिस बल तैनात था, लेकिन स्थानीय निवासियों के विरोध के बावजूद अभियान सफल रहा। विपक्षी नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने इसे ‘अमानवीय’ बताते हुए बिना पर्याप्त नोटिस के कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।
अभियान सुबह 8 बजे शुरू हुआ, जब नगर निगम की टीम के साथ जेसीबी और बुलडोजर मशीनें कुर्सेला बाजार पहुंचीं। यहां कोसी नदी के किनारे बने अवैध निर्माणों को प्राथमिकता दी गई, जो बाढ़ के दौरान खतरा पैदा करते हैं। डीएम अजय सिंह ने बताया, “ये अतिक्रमण वर्षों से जिले की विकास योजनाओं में बाधा बने हुए थे। पूर्व में तीन नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अनदेखी पर कार्रवाई जरूरी थी। इससे सड़क चौड़ीकरण और नाली निर्माण में सहायता मिलेगी।” कुर्सेला में 120 निर्माण ध्वस्त हुए, जबकि बेगूसराय क्षेत्र में 80 दुकानें और घर प्रभावित हुए। प्रभावित परिवारों को अस्थायी आश्रय और सहायता का आश्वासन दिया गया है। एक प्रभावित निवासी ने कहा, “हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। सरकार ने पुनर्वास का वादा किया है, लेकिन कब होगा, यह स्पष्ट नहीं।”
यह अभियान बिहार में नई एनडीए सरकार की व्यापक मुहिम का हिस्सा है, जो पटना से लेकर पूर्णिया तक फैली हुई है। कटिहार में पिछले एक माह में 500 से अधिक अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जिससे 10 करोड़ रुपये का राजस्व बचत होने का अनुमान है। लेकिन पप्पू यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा, “बिना नोटिस के बुलडोजर चलाना अमानवीय है। गरीबों को उजाड़ने से पहले वैकल्पिक जमीन दें। यह विकास नहीं, उत्पीड़न है।” यादव ने जिला प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि अमीरों के अतिक्रमण बचे रहते हैं। आरजेडी और कांग्रेस ने भी समर्थन जताया, जबकि जदयू ने इसे ‘कानूनी कार्रवाई’ बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी मुहिमें विकास को गति देंगी, लेकिन पुनर्वास नीति की कमी से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। कटिहार में बाढ़ प्रभावित इलाकों में अतिक्रमण आम हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आगे की कार्रवाइयां और सख्त होंगी। कुल मिलाकर, यह अभियान शहरों को सुंदर बनाने की दिशा में कदम है, लेकिन मानवीय पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।