10 दिसंबर 2025 – बिहार की सियासी गलियारों में हलचल मचाने वाली एक महत्वपूर्ण घटना घटी, जब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के तीन विधायकों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। यह बैठक 8 दिसंबर को विधानसभा में आयोजित हुई, जिसमें AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान, जोकीहाट विधायक मुर्शिद आलम और बायसी विधायक सरवर आलम शामिल हुए। पार्टी के पांच विधायकों में से केवल तीन की उपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में अटकलों को जन्म दे दिया है – क्या यह सीमांचल के विकास पर केंद्रित थी या नीतीश सरकार के साथ गठबंधन की दिशा में एक कदम? AIMIM ने इसे ‘विकास-केंद्रित’ बताते हुए अफवाहों को खारिज किया, लेकिन विधायकों के बयानों ने बहस को और गहरा दिया।
बैठक का उद्देश्य: सीमांचल के मुद्दों पर फोकस
मुलाकात के दौरान सीमांचल क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। विधायकों ने नदी कटाव की समस्या, सकोर में सैनिक स्टेशन की स्थापना, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती, शिक्षा सुधार और रोजगार सृजन जैसे विषयों को उठाया। अख्तरुल ईमान ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इन मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई का भरोसा दिलाया। विशेष रूप से, जोकीहाट विधायक मुर्शिद आलम ने नीतीश कुमार की तारीफ की, उन्हें ‘मेरा राजनीतिक गुरु’ बताते हुए कहा कि सीएम के नेतृत्व में बिहार का विकास संभव है। आलम ने कहा, “नीतीश जी ने हमेशा सीमांचल को प्राथमिकता दी है, और यह बैठक क्षेत्र के हित में एक सकारात्मक कदम है।” डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी इस बैठक में मौजूद थे, जो इसे औपचारिक बनाती है।
AIMIM के बिहार प्रभारी अख्तरुल ईमान ने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात पार्टी की रणनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय विकास के लिए आवश्यक थी। उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई मुस्लिम समुदाय के उत्थान के लिए है, न कि सत्ता के लिए। अफवाहें बकवास हैं।” पार्टी ने विधायकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का भी एलान किया, जो हालिया चुनावी सफलता के बाद आया। AIMIM ने बिहार विधानसभा में पांच सीटें जीतीं, मुख्यतः सीमांचल से, जो मुस्लिम वोट बैंक की ताकत दिखाती है।
राजनीतिक निहितार्थ: गठबंधन की संभावना?
हालांकि AIMIM इसे विकास बैठक बताती है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह NDA के साथ नजदीकी का संकेत हो सकता है। नीतीश कुमार की बार-बार दल बदलने की इतिहास को देखते हुए, यह मुलाकात JDU में विलय या समर्थन की दिशा में एक कदम लग रही है। एक वरिष्ठ राजनीतिक पर्यवेक्षक ने कहा, “सीमांचल में AIMIM की मजबूत पकड़ NDA के लिए फायदेमंद हो सकती है, खासकर 2025 के नगर निगम चुनावों में।” विपक्षी दलों ने इसे ‘सत्ता की भूख’ करार दिया, जबकि BJP ने चुप्पी साध रखी है। असदुद्दीन ओवैसी ने भी विधायकों को पार्टी लाइन पर चलने की हिदायत दी है।
यह घटना बिहार की जटिल राजनीति को उजागर करती है, जहां क्षेत्रीय दल सत्ता के केंद्र में आकर्षित होते हैं। सीमांचल, जो बाढ़, बेरोजगारी और पिछड़ेपन से जूझ रहा है, के लिए यह बैठक उम्मीद की किरण हो सकती है। यदि वादे पूरे होते हैं, तो यह मुस्लिम समुदाय के लिए लाभदायक साबित होगा। हालांकि, AIMIM को अपनी पहचान बनाए रखने की चुनौती है। कुल मिलाकर, यह मुलाकात बिहार की सियासत में नया मोड़ ला सकती है, जहां विकास और सत्ता का खेल जारी रहेगा।