10 दिसंबर 2025 – केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए 2026 से एक क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की है। यह नई नीति छात्रों को अधिक लचीला और समग्र मूल्यांकन प्रदान करने पर केंद्रित है, जो रटंतवाद को कम कर कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देगी। बोर्ड की आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, यह बदलाव छात्रों की होलिस्टिक डेवलपमेंट सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें दो परीक्षाओं की व्यवस्था, अनुभाग-वार उत्तर लेखन के सख्त नियम और उपस्थिति मानदंड शामिल हैं। लगभग 26.60 लाख छात्रों को प्रभावित करने वाली यह नीति शिक्षा क्षेत्र में एक नया अध्याय खोलेगी।
परीक्षा संरचना में बड़ा बदलाव
2026 से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं दो चरणों में आयोजित होंगी। पहली परीक्षा 17 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगी, जबकि दूसरी (सुधार या पूरक के लिए) 5 मई से 20 मई तक होगी। दोनों परीक्षाएं पूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित होंगी, और छात्रों को पहली परीक्षा अनिवार्य रूप से देनी होगी। दूसरी परीक्षा का विकल्प लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स (एलओसी) भरते समय चुना जा सकता है। दोनों परीक्षाओं के अंकों में से बेहतर स्कोर को अंतिम परिणाम में शामिल किया जाएगा। यदि छात्र पहली परीक्षा में सभी पांच विषयों में पास हो जाते हैं, तो उन्हें पास घोषित किया जाएगा; अन्यथा, वे ‘इम्प्रूवमेंट कैटेगरी’ में आकर दूसरी परीक्षा दे सकेंगे। परिणाम क्रमशः 20 अप्रैल और 30 जून तक घोषित होंगे। यह व्यवस्था छात्रों को तनाव मुक्त तैयारी का अवसर देगी, क्योंकि पहली परीक्षा के स्कोर डिजीलॉकर में उपलब्ध रहेंगे, जो कक्षा 11 प्रवेश के लिए उपयोगी साबित होंगे।
विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में अनुभाग-वार उत्तर लेखन के सख्त नियम
सीबीएसई ने विज्ञान और सामाजिक विज्ञान पेपरों के प्रारूप में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। विज्ञान पेपर अब तीन अनुभागों में विभाजित होगा: जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और भौतिकी। इसी प्रकार, सामाजिक विज्ञान पेपर में चार अनुभाग होंगे: इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र। छात्रों को निर्दिष्ट अनुभागों में ही उत्तर लिखने होंगे; मिश्रित उत्तरों को मूल्यांकन में नहीं लिया जाएगा। बोर्ड ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अनुभागों का उल्लंघन करने पर संबंधित उत्तर शून्य अंकित हो सकते हैं। यह नियम छात्रों को विषय-विशिष्ट समझ विकसित करने और समय प्रबंधन सिखाने का उद्देश्य रखता है।
उपस्थिति और मूल्यांकन प्रक्रिया
नई नीति में कक्षा 9-10 के लिए न्यूनतम 75% उपस्थिति अनिवार्य की गई है, जो परीक्षा के लिए पात्रता सुनिश्चित करेगी। मूल्यांकन प्रक्रिया को रटंत से हटाकर कोर क्षमताओं पर केंद्रित किया गया है, जिसमें व्यावहारिक/आंतरिक मूल्यांकन केवल एक बार होगा। छात्र 84 विषयों में से अपनी रुचि के अनुसार चयन कर सकेंगे, लेकिन मुख्य विषयों (अंग्रेजी, हिंदी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान) के लिए परीक्षा तिथियां निश्चित होंगी। क्षेत्रीय/विदेशी भाषाओं की परीक्षा एक ही दिन में होगी, जबकि अन्य विषयों के लिए 2-3 स्लॉट उपलब्ध होंगे। विशेष आवश्यकता वाले छात्रों (सीडब्ल्यूएसएन) और खेल छात्रों के लिए मौजूदा सुविधाएं बरकरार रहेंगी।
छात्रों और अभिभावकों के लिए निहितार्थ
यह नीति छात्रों को कोचिंग पर निर्भरता कम कर स्वावलंबी बनाएगी, लेकिन अनुशासन की मांग भी बढ़ाएगी। अभिभावकों को एलओसी समय पर भरने और विषय चयन में सतर्क रहना होगा, क्योंकि बदलाव सीमित हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारत की नई शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के अनुरूप है, जो कौशल-आधारित शिक्षा को प्राथमिकता देती है। हालांकि, बोर्ड फीडबैक के आधार पर नीति की समीक्षा करेगा।
संक्षेप में, सीबीएसई की यह पहल शिक्षा को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक कदम है। छात्रों को तत्काल तैयारी शुरू कर देनी चाहिए, ताकि वे इन बदलावों का लाभ उठा सकें।