10 दिसंबर 2025 – भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को चुनाव आयोग (ईसीआई) को कड़ी फटकार लगाई, जब आयोग ने विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया से जुड़ी मतदाताओं की व्यावहारिक समस्याओं पर ‘मैकेनिकल’ और ‘साइकिल्ड’ (पूर्व-निर्मित) जवाब दिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ईसीआई के प्रतिनिधियों से कहा, “आपके जवाब हमेशा मैकेनिकल और साइकिल्ड होते हैं। हर व्यावहारिक समस्या पर आप 90% या 97% के आंकड़े दोहराते रहते हैं।” यह टिप्पणी तमिलनाडु और केरल में SIR की समयसीमा बढ़ाने की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आई, जहां लाखों मतदाता फॉर्म जमा करने में असमर्थ साबित हो रहे हैं।
SIR प्रक्रिया, जो जून 2024 में घोषित हुई, मतदाता सूचियों को शुद्ध करने के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा घर-घर जाकर गणना फॉर्म एकत्र करने पर आधारित है। इसका उद्देश्य डुप्लिकेट वोटरों और अवैध नामों को हटाना है, लेकिन याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह 140 करोड़ मतदाताओं पर नागरिकता साबित करने का अनुचित बोझ डाल रही है। तमिलनाडु में, सबरीमाला तीर्थयात्रा के कारण पहाड़ी क्षेत्रों के प्रवासी श्रमिक दिसंबर के मध्य तक लौटने वाले नहीं हैं, जिससे 56 लाख फॉर्म लंबित हैं। केरल में, 20 लाख से अधिक मतदाता – जिसमें राज्य से बाहर पढ़ने वाले छात्र और वकील शामिल हैं – क्रिसमस छुट्टियों का इंतजार कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता पी.वी. सुरेंद्रनाथ ने कहा, “छात्र बाहर पढ़ रहे हैं, वकील जैसे मैं भी छुट्टियों में लौटकर फॉर्म जमा करेंगे।”
न्यायमूर्ति ज्योमल्या बागची ने BLOs की थकान पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईसीआई BLOs को ‘डेस्क वर्क’ बता रही है, जबकि यह ‘शुद्ध पैदल कार्य’ है। प्रत्येक BLO को 37 दिनों में 1,200 मतदाताओं को कवर करना पड़ता है, जो 35 प्रति दिन के हिसाब से है। ईसीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बचाव में कहा कि 99.27% फॉर्म तमिलनाडु में डिजिटाइज हो चुके हैं और 97.42% केरल में, लेकिन कोर्ट ने इसे ‘अटकलें’ करार दिया। द्विवेदी ने BLOs पर तनाव का दोष राजनीतिक दलों पर डाला, विशेषकर पश्चिम बंगाल और केरल में जहां कांग्रेस ने CPI(M) पर BLOs को दबाव डालने का आरोप लगाया।
कोर्ट ने ईसीआई को निर्देश दिया कि 4 दिसंबर का आदेश – जिसमें राज्यों को बीमार BLOs की जगह अतिरिक्त कर्मी उपलब्ध कराने का बोझ डाला गया – पूरे देश पर लागू होगा। CJI कांत ने चेतावनी दी, “BLOs आपकी वैधानिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं, वे अस्थायी रूप से आपके कर्मचारी हैं। ईसीआई और राज्य उन्हें सुरक्षा प्रदान करें।” पश्चिम बंगाल में BLOs पर हिंसा के मामलों पर कोर्ट ने पूछा, “आपने यह शक्ति क्यों नहीं इस्तेमाल की?” ईसीआई ने केंद्रीय बलों का उपयोग करने का वादा किया। केरल याचिका पर 18 दिसंबर को फैसला होगा, जबकि तमिलनाडु की समयसीमा 11 दिसंबर तक बरकरार।
यह सुनवाई SIR की व्यापक चुनौतियों को उजागर करती है, जहां याचिकाकर्ता नागरिकता जांच को ‘जांच-पड़ताल’ बता रहे हैं, जो विदेशी ट्रिब्यूनल्स का क्षेत्र है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया अल्पसंख्यकों, विशेषकर CAA के तहत नागरिकता का इंतजार कर रहे बांग्लादेशी शरणार्थियों (हिंदू, ईसाई, जैन, बौद्ध) को हतोत्साहित कर सकती है। असम में ‘स्पेशल रिवीजन’ न करने पर अलग याचिका पर ईसीआई से जवाब मांगा गया है, जहां 40-50 लाख अवैध प्रवासियों का दावा है। कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप SIR को अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, जो लोकतंत्र की नींव – स्वच्छ मतदाता सूची – को मजबूत करेगा, बशर्ते व्यावहारिक बाधाएं दूर हों।