19 दिसंबर 2025, SIR – भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने गुजरात की मतदाता सूची में एक ऐतिहासिक सफाई अभियान चलाया है। विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) के तहत ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स जारी करने के साथ ही राज्य की वोटर लिस्ट से 73.73 लाख नाम हटा दिए गए हैं। पहले 5.08 करोड़ पंजीकृत वोटरों की संख्या अब घटकर 4.34 करोड़ रह गई है। यह कदम मृत, अनुपस्थित, माइग्रेटेड और डुप्लिकेट एंट्रीज को हटाने के लिए उठाया गया, जो लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने का प्रयास है। लेकिन यह बदलाव राजनीतिक हलचल भी मचा रहा है, क्योंकि विपक्ष इसे ‘वोटर सप्रेशन’ का हथकंडा बता रहा है। आपत्तियों और दावों की समय सीमा 20 दिसंबर से 18 जनवरी तक है।
इस रिपोर्ट में हम SIR अभियान की पूरी कहानी, इसके पीछे के कारणों, प्रभावों, राजनीतिक बहस और नागरिकों के लिए अगले कदमों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। गुजरात जैसे विकासशील राज्य में यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। निवेशकों और राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण संकेत है कि चुनावी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और डिजिटल हो रही है।
SIR अभियान की पृष्ठभूमि: एक गहन सफाई प्रक्रिया
विशेष गहन संशोधन (SIR) चुनाव आयोग की एक विशेष पहल है, जो हर पांच साल में या जरूरत पड़ने पर मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए चलाई जाती है। गुजरात में यह अभियान 1 अक्टूबर 2025 को शुरू हुआ था, जिसमें 1 जनवरी 2026 को क्वालीफाइंग डेट रखी गई। घर-घर जाकर वोटरों के फॉर्म (Form 4) भरवाए गए, जो बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) द्वारा सत्यापित किए गए। कुल 2.65 करोड़ घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 99.97% कवरेज हासिल हुआ।
ECI के अनुसार, यह अभियान 2019 के बाद पहली बार इतने बड़े पैमाने पर चला, जब गुजरात में वोटर लिस्ट में अनियमितताओं की शिकायतें बढ़ी थीं। पिछले वर्षों में डुप्लिकेट वोटिंग और मृत वोटरों के नाम बने रहने की घटनाएं सामने आईं, जो चुनावी धांधली का कारण बनती रहीं। SIR का उद्देश्य ‘वन पर्सन, वन वोट’ सुनिश्चित करना है, जो डिजिटल टूल्स जैसे ECI की वोटर हेल्पलाइन ऐप और NVSP पोर्टल के जरिए संभव हुआ। गुजरात के अलावा, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी समान अभियान चल रहे हैं, जहां कुल 1 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं।
डिलीशन का ब्रेकडाउन: कौन-कौन से नाम हटे?
ड्राफ्ट रोल्स 19 दिसंबर को अहमदाबाद में जारी किए गए। ECI के आंकड़ों के मुताबिक, 73.73 लाख नामों में से:
- मृत वोटर: 18 लाख से अधिक। ये वे नाम थे जो 2020 के बाद दर्ज मौतों के बावजूद लिस्ट में बने हुए थे।
- अनुपस्थित वोटर: 9.6 लाख। घर पर न मिलने वाले या शिफ्ट हो चुके लोग।
- माइग्रेटेड वोटर: 40 लाख। स्थायी रूप से अन्य जगह चले गए, लेकिन पुरानी एंट्री बनी रही।
- डुप्लिकेट एंट्रीज: 3.8 लाख। एक ही व्यक्ति के कई नाम या गलत डिटेल्स।
- फॉर्म न सबमिट: 74 लाख वोटरों ने SIR फॉर्म नहीं भरा, जिससे उनकी वैलिडेशन न हो सकी। इसके अलावा, 44.45 लाख वोटरों को मैप नहीं किया जा सका।
अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा जैसे शहरी जिलों में सबसे ज्यादा डिलीशन्स हुए, जहां माइग्रेशन रेट हाई है। ग्रामीण इलाकों में मृत और अनुपस्थित वोटरों की संख्या ज्यादा थी। कुल मिलाकर, वोटरों की संख्या में 14.5% की कमी आई, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। ECI ने स्पष्ट किया कि ये डिलीशन्स प्राविजनल हैं और आपत्ति के बाद फाइनल रोल्स 25 फरवरी 2026 को जारी होंगे।
कारण और प्रक्रिया: पारदर्शिता का दावा
ECI का कहना है कि यह सफाई डिजिटल वेरिफिकेशन पर आधारित थी। BLOs ने आधार, PAN और मोबाइल नंबर से क्रॉस-चेक किया। घर-घर सर्वे में फोटो और बायोमेट्रिक डेटा लिया गया, जो NVSP डेटाबेस से मैच किया। डुप्लिकेट्स को हटाने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल हुआ, जो 11.58 लाख संदिग्ध एंट्रीज पकड़ चुके थे।
हालांकि, प्रक्रिया की आलोचना भी हो रही है। कई वोटरों ने शिकायत की कि BLOs ने फॉर्म भरने का मौका नहीं दिया या सर्वे अधूरा रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में भाषा की समस्या और जागरूकता की कमी ने 74 लाख फॉर्म्स न भरने का कारण बना। ECI ने जवाब दिया कि 1.2 करोड़ नए फॉर्म्स भी सबमिट हुए, जिससे 50 लाख नए वोटर जुड़ सकते हैं। यह प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत करने वाली है, लेकिन क्या यह सभी को समान अवसर दे पाई? यह सवाल बाकी है।
राजनीतिक प्रभाव: विपक्ष का हंगामा, सत्ताधारी का बचाव
यह डिलीशन राजनीतिक तूफान ला सकता है। कांग्रेस और AAP ने इसे ‘वोटर सप्रेशन’ बताया, खासकर अल्पसंख्यक और गरीब वोटरों पर असर का आरोप लगाया। गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष शक्तिसिंह गोहिल ने कहा, “यह BJP की साजिश है, जो 2027 चुनावों में विपक्ष को कमजोर करेगी।” AAP के गोपाल राय ने दिल्ली मॉडल का हवाला देते हुए ECI पर पक्षपात का इल्जाम लगाया।
दूसरी ओर, BJP ने इसे ‘पारदर्शी प्रक्रिया’ का नाम दिया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने ट्वीट किया, “गुजरात लोकतंत्र का मॉडल बनेगा।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी माइग्रेशन से BJP को फायदा हो सकता है, जबकि ग्रामीण डिलीशन्स विपक्ष को नुकसान पहुंचाएंगे। 2022 के विधानसभा चुनावों में BJP की 156 सीटों वाली जीत पर यह बदलाव असर डालेगा। राष्ट्रीय स्तर पर, यह 2024 लोकसभा के बाद ECI की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव: क्या बदलेगा?
गुजरात की 7 करोड़ आबादी में 14% कमी का असर गहरा होगा। महिलाओं (52% वोटर) और युवाओं (18-25 आयु वर्ग) पर ज्यादा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि माइग्रेशन जॉब्स के लिए होता है। आर्थिक रूप से, यह औद्योगिक हब गुजरात को प्रभावित करेगा, जहां 40 लाख माइग्रेंट वर्कर्स हैं। सामाजिक न्याय के लिहाज से, SC/ST समुदायों में डुप्लिकेट्स ज्यादा थे, जो उनकी आवाज को कमजोर कर सकता है।
लेकिन सकारात्मक पक्ष भी है: साफ सूची से वोटिंग प्रक्रिया तेज होगी, EVM हैकिंग की आशंकाएं कम होंगी। ECI का दावा है कि इससे 2026 के लोकसभा चुनावों में 99% टर्नआउट संभव है।
आपत्ति कैसे दर्ज करें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
यदि आपका नाम हटा है या गलती है, तो चिंता न करें। ECI ने 20 दिसंबर से 18 जनवरी तक क्लेम्स और आपत्तियों का विंडो खोला है:
- नाम चेक करें: NVSP.gov.in या वोटर हेल्पलाइन ऐप पर AC नंबर/EPIC डालें।
- फॉर्म भरें: Form 6 (नया रजिस्ट्रेशन), Form 7 (डिलीशन आपत्ति), Form 8 (सुधार) डाउनलोड करें।
- सबमिट: ऑनलाइन NVSP पर या BLO/DEO ऑफिस में। फीस फ्री।
- ट्रैक: ऐप पर स्टेटस चेक करें। फाइनल रोल्स 25 फरवरी को।
ECI ने 1 लाख BLOs को ट्रेनिंग दी है, जो मदद करेंगे।
निष्कर्ष: लोकतंत्र की मजबूती या चुनौती?
गुजरात SIR का यह ‘सफाया’ लोकतंत्र की सफाई का प्रतीक है, लेकिन क्या यह सभी को न्याय दे पाया? 73.73 लाख नाम हटाने से सूची शुद्ध हुई, लेकिन लाखों वोटरों की आवाज दबने का खतरा है। ECI को अब आपत्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी। राजनीतिक दलों को जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। गुजरात 2027 चुनावों के लिए तैयार हो रहा है, और यह बदलाव इतिहास रचेगा।