20 दिसंबर 2025, Maharashtra– Maharashtra के नागपुर जिले के बुटिबोड़ी औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार (19 दिसंबर) दोपहर एक सौर पैनल निर्माण कारखाने में पानी की टंकी के धसाव से छह बिहारी मजदूरों की मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब मजदूर टंकी के नीचे काम कर रहे थे। मृतकों में चंपारण, पाहड़पुर, मुजफ्फरपुर और बेतिया के चार मजदूर शामिल हैं, जो बिहार से रोजगार के सिलसिले में नागपुर आए थे। घटना में नौ अन्य मजदूर घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बिहार सरकार ने मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है, जबकि महाराष्ट्र सरकार ने भी जांच के आदेश दिए हैं। यह दुखद घटना न केवल प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ी करती है, बल्कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को भी उजागर करती है।
हादसे का पूरा विवरण: दोपहर की तबाही
घटना बुटिबोड़ी के वाधोना इलाके में स्थित एक सौर पैनल निर्माण इकाई में दोपहर करीब 2:30 बजे घटी। यह कारखाना अभी निर्माणाधीन था, और मजदूर पानी की टंकी के नीचे कंक्रीट का काम कर रहे थे। अचानक टंकी का ऊपरी हिस्सा धंस गया, जिससे हजारों लीटर पानी मजदूरों पर गिर पड़ा। टंकी का वजन इतना भारी था कि यह मजदूरों को दबाकर रख दिया। स्थानीय पुलिस के अनुसार, टंकी का निर्माण हाल ही में पूरा हुआ था, लेकिन गुणवत्ता परीक्षण ठीक से नहीं किया गया था। नागपुर ग्रामीण पुलिस के एसपी राकेश चौरसिया ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद बचाव कार्य शुरू हो गया, लेकिन मलबे और पानी की वजह से प्रक्रिया में दो घंटे लग गए।
मलबे से निकाले गए मृतकों की पहचान अरविंद कुमार ठाकुर (28 वर्ष, चंपारण, बिहार), अशोक कंचन पटेल (42 वर्ष, पाहड़पुर, बिहार), अजय राजेश्वर पासवान (26 वर्ष, मुजफ्फरपुर, बिहार), और बेतिया के दो अन्य मजदूरों के रूप में हुई है। शेष दो की पहचान अभी जारी है। सभी मृतक बिहार के विभिन्न जिलों से थे और कारखाने में ठेके पर काम कर रहे थे। घायलों में से सात को गंभीर चोटें आई हैं, जिनमें सिर और छाती पर गहरी चोटें शामिल हैं। उन्हें नागपुर के मेयो जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। बचाव कार्य में एनडीआरएफ की टीम ने अहम भूमिका निभाई, और मलबे हटाने के लिए क्रेन का इस्तेमाल किया गया।
तत्काल प्रतिक्रिया: प्रशासन और सरकार की कार्रवाई
हादसे की सूचना मिलते ही नागपुर जिला प्रशासन, पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। Maharashtra के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए कि घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए और मृतकों के शवों का पोस्टमॉर्टम कराया जाए। शिंदे ने कहा, “यह दुखद है। हम पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।” राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की, जबकि घायलों के लिए 50 हजार रुपये का प्रावधान किया।
बिहार सरकार की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये के अनुदान की घोषणा की और बिहार के प्रवासी मजदूर कल्याण बोर्ड को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त सहायता पहुंचाई जाए। बिहार के श्रम मंत्री जीवेश मिश्रा ने कहा, “हमारे मजदूर देश के विकास की रीढ़ हैं। इस घटना से हमें दुख हुआ है, और हम केंद्र सरकार से सुरक्षा मानकों को सख्त करने की मांग करेंगे।” परिवारों को सूचना मिलते ही बिहार से रिश्तेदार नागपुर पहुंचने लगे, और चंपारण व मुजफ्फरपुर में शोक सभा का आयोजन किया गया। ठेकेदार कंपनी पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, जिसमें लापरवाही का आरोप लगाया गया है।
व्यापक संदर्भ: प्रवासी मजदूरों की असुरक्षा का आईना
यह हादसा Maharashtra में प्रवासी मजदूरों की बढ़ती असुरक्षा को दर्शाता है। बिहार से लाखों मजदूर रोजगार के लिए Maharashtra, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में जाते हैं, लेकिन निर्माण स्थलों पर सुरक्षा उपकरणों की कमी और खराब निर्माण सामग्री उनकी जान जोखिम में डाल देती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, 2024 में ही निर्माण हादसों में 1,200 से अधिक मजदूर मारे गए, जिनमें 40% प्रवासी थे। महाराष्ट्र में पिछले दो वर्षों में 15 ऐसे बड़े हादसे हो चुके हैं, जिसमें 50 से अधिक बिहारी मजदूरों की मौत हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि ठेकेदारों द्वारा सस्ते सामान का इस्तेमाल और सुरक्षा प्रशिक्षण की कमी मुख्य कारण हैं।
केंद्र सरकार ने 2023 में ‘प्रवासी मजदूर सुरक्षा अधिनियम’ लागू किया था, जिसमें निर्माण स्थलों पर हेलमेट, हार्नेस और नियमित जांच अनिवार्य है। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन न्यूनतम है। ट्रेड यूनियनों ने मांग की है कि प्रत्येक राज्य में प्रवासी हेल्पलाइन स्थापित की जाए और ठेकेदारों पर जुर्माना बढ़ाया जाए। बिहार सरकार ने भी ‘प्रवासी पोर्टल’ लॉन्च किया है, जहां मजदूर अपनी लोकेशन शेयर कर सकते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी बाधा बनी हुई है। यह घटना कोविड काल के बाद प्रवासियों की स्थिति को और उजागर करती है, जब लाखों मजदूर बिना सहायता के लौटे थे।
निष्कर्ष: सुरक्षा के लिए ठोस कदम जरूरी
नागपुर का यह हादसा एक चेतावनी है कि आर्थिक विकास के नाम पर मजदूरों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं। मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजा तो राहत देगा, लेकिन खोई जिंदगियां वापस नहीं ला सकता। सरकारों को अब कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर सख्त निगरानी और प्रशिक्षण पर जोर देना होगा। प्रवासी मजदूरों को सम्मान और सुरक्षा का हक है, जो देश की प्रगति का आधार हैं। क्या यह घटना बदलाव लाएगी? उम्मीद है कि हां। फैंस और सामाजिक संगठन शोक व्यक्त कर रहे हैं, और सोशल मीडिया पर #SaveMigrantWorkers ट्रेंड कर रहा है।