20 दिसंबर 2025, Bihar Teacher: बिहार के शिक्षण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होते हुए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने टीचर सक्षमता परीक्षा (सक्षमता परीक्षा) के चौथे चरण का परिणाम घोषित कर दिया है। कुल 14,936 उम्मीदवारों में से 4,932 शिक्षकों ने इस परीक्षा में सफलता हासिल की है, जिससे उनका राज्य कर्मी बनने का रास्ता साफ हो गया है। खास बात यह है कि सफल उम्मीदवारों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं अधिक रही, जो 2,725 महिलाओं के मुकाबले 2,207 पुरुषों की संख्या दर्शाती है। यह परिणाम न केवल शिक्षकों की क्षमता को प्रमाणित करता है, बल्कि बिहार सरकार की ‘सात निश्चय’ योजना के तहत शिक्षण गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस रिपोर्ट में हम परीक्षा के विवरण, सफलता के आंकड़ों, महिलाओं की भूमिका, परिणाम जांच प्रक्रिया और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सक्षमता परीक्षा, जिसे कॉम्पिटेंसी टेस्ट फॉर टीचर्स (CTT) के नाम से भी जाना जाता है, बिहार के स्थानीय निकाय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए अनिवार्य है। यह परीक्षा कक्षा 1 से 12 तक के शिक्षकों की विषयगत ज्ञान और शिक्षण दक्षता का मूल्यांकन करती है। चौथा चरण 24 से 27 सितंबर 2025 तथा 12 और 22 अक्टूबर 2025 को आयोजित किया गया था। परीक्षा कंप्यूटर आधारित (CBT) फॉर्मेट में हुई, जिसमें 2 घंटे 30 मिनट का समय दिया गया। प्रश्न पत्र में 150 वस्तुनिष्ठ प्रश्न थे, जिनमें 30 भाषा अनुभाग से, 40 सामान्य अध्ययन से और शेष विषयगत ज्ञान से संबंधित थे। विभिन्न कक्षाओं के लिए उम्मीदवारों की संख्या इस प्रकार थी: कक्षा 1-5 के लिए 13,726, कक्षा 6-8 के लिए 378, कक्षा 9-10 के लिए 592 तथा कक्षा 11-12 के लिए 231। कुल उपस्थिति दर लगभग 100% रही, जो उम्मीदवारों की उत्साहपूर्ण भागीदारी को दर्शाती है।
परिणाम की घोषणा आज दोपहर BSEB मुख्यालय से की गई, जहां समिति के अध्यक्ष आनंद कृष्ण ने कहा, “यह परिणाम बिहार के शिक्षण पेशे को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सफल उम्मीदवारों को बधाई, और शेष को आगे की तैयारी के लिए प्रोत्साहन।” कुल सफलता दर 33.02% रही, जो पिछले चरणों की तुलना में मामूली सुधार दर्शाती है। वर्गीकृत अंक मानदंडों के अनुसार, सामान्य वर्ग के लिए 40%, पिछड़े वर्ग (BC) के लिए 36.5%, अत्यंत पिछड़े वर्ग (EBC) के लिए 34% तथा अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), दिव्यांग और महिला उम्मीदवारों के लिए 32% न्यूनतम अंक निर्धारित थे। इन मानदंडों को पूरा करने वाले ही सफल घोषित किए गए। महिलाओं की अधिक सफलता को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यह लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक संकेत है। बिहार में शिक्षण क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी पहले से ही 60% से अधिक है, और यह परिणाम इसे और मजबूत करेगा।
परिणाम की विस्तृत ब्रेकडाउन से पता चलता है कि प्राथमिक स्तर (कक्षा 1-5) पर सबसे अधिक सफलता मिली, जहां 4,000 से अधिक उम्मीदवार पास हुए। माध्यमिक स्तर (कक्षा 9-10) पर 800 से ज्यादा ने सफलता पाई, जबकि उच्च माध्यमिक (कक्षा 11-12) पर संख्या अपेक्षाकृत कम रही। विषयवार विश्लेषण में गणित, विज्ञान और हिंदी जैसे विषयों में बेहतर प्रदर्शन देखा गया, जबकि सामाजिक विज्ञान में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है। BSEB ने उत्तर कुंजी 15 नवंबर को जारी की थी, जिस पर आपत्तियां 18 नवंबर तक आमंत्रित की गईं। इन आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम परिणाम तैयार किया गया। परीक्षा का उद्देश्य शिक्षकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा प्रदान करना है, जिससे उन्हें स्थायी नौकरी, पेंशन और अन्य लाभ मिलेंगे। वर्तमान में बिहार के लगभग 3 लाख स्थानीय निकाय शिक्षक इस परीक्षा के दायरे में हैं, और अब तक के चार चरणों में 20,000 से अधिक पास हो चुके हैं।
परिणाम जांचने की प्रक्रिया सरल है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट sakshamtabihar.com पर जाकर लॉगिन आईडी और पासवर्ड से प्रवेश कर सकते हैं। होमपेज पर ‘सक्षमता परीक्षा 4 परिणाम 2025’ लिंक पर क्लिक करें, विवरण भरें, स्कोरकार्ड डाउनलोड करें और प्रिंट आउट लें। यदि कोई तकनीकी समस्या हो, तो हेल्पलाइन नंबर 0612-2233333 पर संपर्क करें। BSEB ने स्पष्ट किया है कि स्कोरकार्ड में कोई विसंगति होने पर 48 घंटों के अंदर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। डायरेक्ट लिंक: https://sakshamtabihar.com/ अब अगला चरण काउंसलिंग का होगा, जिसकी तिथियां जल्द घोषित होंगी। काउंसलिंग में सफल उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी होंगे, और राज्य स्तर पर पदस्थापना होगी। शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह प्रक्रिया जनवरी 2026 से शुरू हो सकती है, जिससे स्कूलों में शिक्षक भर्ती तेज होगी।”
इस परिणाम का बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। सक्षमता परीक्षा सरकार की ‘शिक्षा में गुणवत्ता’ नीति का हिस्सा है, जो 2016 से चल रही है। इससे शिक्षकों की दक्षता बढ़ेगी, जो अंततः छात्रों के प्रदर्शन को सुधारेगी। महिलाओं की सफलता को देखते हुए, विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि महिला-केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए। हालांकि, चुनौतियां भी हैं – जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी से परिणाम जांच में देरी। BSEB ने मोबाइल ऐप विकसित करने की योजना बनाई है। राजनीतिक दृष्टि से, यह नीतीश कुमार सरकार की उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जो विपक्ष द्वारा ‘शिक्षा सुधारों’ पर सवाल उठाने का जवाब देगी।
निष्कर्षतः सक्षमता परीक्षा का चौथा चरण बिहार के शिक्षकों के लिए नई उम्मीद की किरण है। 4,932 सफल उम्मीदवार, खासकर महिलाओं का दबदबा, राज्य की शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने का संकेत देता है। यह न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव लाएगा, बल्कि बिहार को शिक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करेगा। सफल उम्मीदवारों को हार्दिक बधाई, और शेष को आगे की परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं। क्या यह प्रक्रिया बिहार को ‘शिक्षित राज्य’ बनाने में सफल होगी? समय इसका उत्तर देगा, लेकिन शुरुआत सशक्त है।