18 जनवरी 2026, Kishanganj में कोयला और पान मसाला के 23 ट्रकों की जब्ती: किशनगंज, बिहार: हाल ही में बिहार के किशनगंज जिले में वाणिज्य कर विभाग की एक विशेष टीम ने अवैध तस्करी और टैक्स चोरी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। पटना से आई स्पेशल टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-27 पर 23 ट्रकों को रोका और जांच के बाद उन्हें जब्त कर लिया। इन ट्रकों में कोयला और पान मसाला जैसी सामग्री लदी हुई थी, जो बिना उचित दस्तावेजों के परिवहन की जा रही थी। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य राज्य के राजस्व को बढ़ावा देना और अवैध व्यापार पर लगाम लगाना है। यह घटना किशनगंज की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि जिला नेपाल की सीमा से सटा हुआ है, जहां से तस्करी की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं।
किशनगंज में तस्करी की समस्या
किशनगंज बिहार का एक सीमावर्ती जिला है, जो नेपाल की सीमा से लगभग 20-30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह क्षेत्र अपनी खुली सीमाओं के कारण अवैध व्यापार का केंद्र बन चुका है। नेपाल से सटी सीमा पर तस्करी की घटनाएं आम हैं, जिसमें पशु तस्करी, मादक पदार्थ, हथियार और यहां तक कि दैनिक उपयोग की वस्तुओं की अवैध ढुलाई शामिल है। कोयला और पान मसाला जैसी सामग्री की तस्करी मुख्य रूप से टैक्स चोरी के उद्देश्य से की जाती है। कोयला, जो औद्योगिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है, अक्सर झारखंड या अन्य राज्यों से लाकर बिना जीएसटी और ई-वे बिल के नेपाल या अन्य क्षेत्रों में भेजा जाता है। इसी तरह, पान मसाला तंबाकू उत्पाद होने के कारण उच्च कर दरों के अधीन आता है, और तस्कर इसे बिना कर चुकाए बाजार में उतारने की कोशिश करते हैं।
बिहार सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सीमावर्ती जिलों में टैक्स चोरी से राज्य को每年 करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। नेपाल सीमा पर एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) और स्थानीय पुलिस की सख्ती के बावजूद, तस्कर नए-नए तरीके अपनाते हैं, जैसे वाहनों में छिपाकर सामान ले जाना या फर्जी दस्तावेजों का उपयोग। किशनगंज में पहले भी पशु तस्करी, चरस और अन्य अवैध सामानों की जब्ती की घटनाएं हो चुकी हैं, जो इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को दर्शाती हैं। इस बार की कार्रवाई को राज्य स्तर पर टैक्स evasion अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य राजस्व संग्रह को मजबूत करना है।
घटना का विस्तृत विवरण
घटना की शुरुआत तब हुई जब पटना से वाणिज्य कर विभाग की एक विशेष टीम किशनगंज पहुंची। टीम ने एनएच-27 पर वाहनों की सघन जांच शुरू की, जो नेपाल सीमा की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग है। जांच के दौरान 23 ट्रकों को रोका गया, जिनमें से कई में कोयला और पान मसाला लदा हुआ पाया गया। टीम ने जीएसटी बिल, ई-वे बिल और अन्य दस्तावेजों की जांच की, जिसमें कई अनियमितताएं पाई गईं। कुल 9 ट्रकों में कोयला और 4 ट्रकों में पान मसाला जब्त किया गया, जबकि अन्य ट्रकों में भी संदिग्ध सामग्री थी।
अन्वेषण ब्यूरो की टीम, जो वाणिज्य कर विभाग के अधीन कार्य करती है, ने इस ऑपरेशन का नेतृत्व किया। सूत्रों के अनुसार, अवैध माल ढुलाई की शिकायत मिलने के बाद यह अभियान चलाया गया। ट्रकों की तलाशी में लगभग 50 मीट्रिक टन कोयला और बड़ी मात्रा में पान मसाला बरामद हुआ। ट्रक चालकों से पूछताछ में पता चला कि सामान झारखंड या पश्चिम बंगाल से लाया जा रहा था और नेपाल या बांग्लादेश की ओर ले जाया जा रहा था। बिना कर चुकाए यह व्यापार तस्करों को लाखों रुपये का मुनाफा देता है, लेकिन राज्य को राजस्व का नुकसान होता है।
कार्रवाई के दौरान टीम ने ट्रकों को सील कर दिया और उन्हें स्थानीय थाने या गोदाम में रखा गया। कोई गिरफ्तारी की खबर नहीं है, लेकिन चालकों और मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह अभियान एक महीने तक चलने वाला है, जैसा कि डीएम ने पहले घोषित किया था, जिसमें ओवरलोडिंग और अवैध तस्करी पर फोकस है।
एजेंसियों की भूमिका और प्रक्रिया
इस ऑपरेशन में मुख्य रूप से वाणिज्य कर विभाग की पटना स्पेशल टीम शामिल थी, जो अन्वेषण ब्यूरो के रूप में जानी जाती है। टीम में जीएसटी अधिकारी, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के सदस्य थे। प्रक्रिया में पहले सूचना एकत्र की गई, फिर सड़क पर चेकिंग पॉइंट स्थापित किए गए। प्रत्येक ट्रक की जांच में दस्तावेजों की वैधता, सामान की मात्रा और मूल्यांकन किया गया। जहां अनियमितता पाई गई, वहां तुरंत जब्ती की गई।
यह कार्रवाई राज्य सरकार की ‘राजस्व बढ़ाने’ की नीति का हिस्सा है, जिसमें सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एसएसबी जैसी केंद्रीय एजेंसियां भी नेपाल सीमा पर निगरानी रखती हैं, लेकिन इस मामले में मुख्य रूप से राज्य स्तर की टीम सक्रिय थी।
परिणाम और प्रभाव
इस जब्ती से राज्य को लाखों रुपये का राजस्व लाभ होने की उम्मीद है। जब्त सामान का मूल्यांकन किया जा रहा है, और जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया शुरू होगी। यह कार्रवाई तस्करों के लिए एक चेतावनी है, जो अब अधिक सतर्क हो सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं केवल सतह पर हैं; गहरी साजिश में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क शामिल हो सकते हैं।
आर्थिक रूप से, यह राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी। कोयला जैसे संसाधनों की अवैध ढुलाई से पर्यावरण को भी नुकसान होता है, क्योंकि अनियमित खनन बढ़ता है। पान मसाला की तस्करी स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाती है, क्योंकि यह तंबाकू उत्पाद है। सामाजिक रूप से, यह स्थानीय समुदाय को अवैध गतिविधियों से दूर रखने में मदद करेगी।
निष्कर्ष: आगे की चुनौतियां और सुझाव
यह घटना दर्शाती है कि किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिलों में तस्करी एक बड़ी समस्या है, लेकिन सख्त कार्रवाई से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। सरकार को डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, जैसे ई-वे बिल की सख्ती और सीमा पर अधिक निगरानी बढ़ानी चाहिए। स्थानीय लोगों को जागरूक करने के अभियान भी चलाए जा सकते हैं। कुल मिलाकर, यह राजस्व बढ़ाने का एक सकारात्मक प्रयास है, जो बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।
Sources: दैनिक भास्कर