ARARIA

24 दिसंबर 2025, Araria: दिसंबर के अंत में बिहार के Araria जिले में कड़ाके की ठंड ने न केवल जनजीवन को ठप कर दिया है, बल्कि स्वास्थ्य संकट को भी जन्म दे दिया है। कोल्ड डायरिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर बच्चों में। सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या एक दर्जन से अधिक हो चुकी है, और सबसे दुखद यह कि एक सात माह के शिशु की मौत हो गई। ठंड की लहर ने प्रवासी मजदूर परिवारों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, जहां असुरक्षित रहन-सहन और स्वच्छता की कमी ने महामारी जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। मौसम विभाग ने जिले में कोल्ड डे अलर्ट जारी किया है, और स्कूलों को 24 दिसंबर तक बंद रखने का आदेश दिया गया है। यह रिपोर्ट इस संकट की गहराई, कारणों, प्रभावों और बचाव के उपायों पर प्रकाश डालती है, ताकि अभिभावक सतर्क रह सकें।

कोल्ड डायरिया: एक नजर में समझें कोल्ड डायरिया, जिसे विंटर डायरिया भी कहा जाता है, सर्दियों में ठंड के कारण होने वाला पाचन तंत्र का संक्रमण है। यह वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन से जुड़ा होता है, जहां ठंड से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है। लक्षणों में दस्त, उल्टी, पेट दर्द, बुखार और निर्जलीकरण प्रमुख हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड में मांसपेशियां प्रभावित होती हैं, जिससे आंतों की गतिविधि बाधित हो जाती है। बिहार जैसे उत्तरी राज्यों में यह समस्या आम है, क्योंकि यहां सर्दी में तापमान 5-8 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। 2025 की सर्दी में पश्चिमी विक्षोभ के कारण ठंड असामान्य रूप से तीव्र हुई है, जिससे घना कोहरा और शीतलहर ने हालात बिगाड़ दिए। Araria में पिछले पांच दिनों से तापमान 6 डिग्री के आसपास घूम रहा है, जो इस बीमारी के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है।

सदर अस्पताल में स्थिति: आंकड़ों की पड़ताल Araria सदर अस्पताल के शिशु वार्ड में हालात चिंताजनक हैं। पिछले चार दिनों में 15 से अधिक बच्चे भर्ती हो चुके हैं, जिनमें से अधिकांश तीन वर्ष से कम उम्र के हैं। डॉ. राम कुमार, अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि रविवार देर शाम सात माह के एक शिशु की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चे गंभीर हालत में हैं। भर्ती बच्चों में तीन वर्षीय नूर हसन, डेढ़ वर्षीय कुलसुम खातून और डेढ़ वर्षीय नीम खातून शामिल हैं। ये सभी ईंट भट्टों पर काम करने वाले प्रवासी मजदूर परिवारों से हैं, जहां खुले में रहने और ठंडे पानी के इस्तेमाल से संक्रमण फैला। अस्पताल में दवाओं का स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन ओपीडी में मरीजों की संख्या 1400 से अधिक पहुंच गई है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने विशेष मॉनिटरिंग टीम गठित की है, और चिकित्सकों को ड्यूटी पर तैनात रखा गया है।

कारण: ठंड के साथ जुड़े बहुआयामी खतरे इस संकट के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। प्राथमिकतः, कड़ाके की ठंड से शरीर का तापमान गिरता है, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। ठंडे मौसम में वायरस जैसे रोटावायरस या नोरovirus सक्रिय हो जाते हैं, जो दूषित पानी या भोजन से फैलते हैं। Araria के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पानी की कमी और खुले में शौच की प्रथा ने समस्या को बढ़ावा दिया। प्रवासी परिवारों में पोषण की कमी और अस्वच्छ रहन-सहन ने बच्चों को सबसे ज्यादा जोखिम में डाल दिया। इसके अलावा, ठंड में लोग गर्म पानी की बजाय ठंडा पानी पीते हैं, जो आंतों को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बीपी और ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों में भी कोल्ड डायरिया के लक्षण बढ़ जाते हैं। 2025 की सर्दी में बिहार के 27 जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी है, जो Araria को सबसे प्रभावित कर रहा है।

प्रभाव: परिवारों पर भावनात्मक और आर्थिक बोझ यह महामारी न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक संरचना को भी हिला रही है। प्रवासी मजदूर परिवार, जो ईंट भट्टों पर निर्भर हैं, काम पर जाने में असमर्थ हो रहे हैं। एक मौत ने पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ा दी है, और भर्ती बच्चों के अभिभावक अस्पताल के बाहर रातें काट रहे हैं। जिले में कोल्ड डायरिया के अलावा सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसे मामलों में 20-25% की वृद्धि हुई है। स्कूलों का बंद होना शिक्षा को प्रभावित कर रहा है, खासकर कक्षा पांच तक के बच्चों को। कुल मिलाकर, यह संकट गरीब तबके को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है, जहां इलाज का खर्च परिवारों पर बोझ बन रहा है।

बचाव के उपाय: विशेषज्ञों की सलाह डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते सावधानी बरतने से इस बीमारी को रोका जा सकता है। सबसे पहले, गुनगुना पानी पीना और साफ-सुथरा भोजन सुनिश्चित करें। बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं, और ठंडे पानी से न नहलाएं। हाथ धोने की आदत डालें, और दूध या भोजन को उबालकर दें। लक्षण दिखते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएं, क्योंकि निर्जलीकरण घातक हो सकता है। जिला प्रशासन ने रैन बसेरों की व्यवस्था की है, और स्वास्थ्य कैंप लगाए जा रहे हैं। अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, ताकि छोटी बीमारी बड़ी न बने।

निष्कर्ष: Araria में कोल्ड डायरिया का प्रकोप ठंड की मार का कड़वा सच है, जो एक मौत और दर्जनों भर्तियों के रूप में सामने आया है। सदर अस्पताल की टीम संघर्षरत है, लेकिन सरकारी प्रयासों को मजबूत करने की जरूरत है। स्वच्छता और जागरूकता ही इस संकट का समाधान है। अगर अभिभावक एकजुट होकर सावधानी बरतें, तो यह सर्दी घातक न साबित हो। जिला प्रशासन से अपील है कि प्रवासी परिवारों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं। आखिरकार, बच्चों का स्वास्थ्य ही समाज की धुरी है—इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी।

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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